Philosophy · poetry

उम्मीद

कभी छावॅ है, तो कभी धूप है, अभी रात है, पर सवेरे का इतंजार है, सूरज की पहली किरन से आश है। सासॅ है, तो जान है। जिदंगी है,तो उम्मीद है। चल, अचल का उत्साह है, बेताब धारा की उल्लास है, पर सागर जैसा ठहराव है। कभी छावॅ है, तो कभी धूप है, रात है,… Continue reading उम्मीद